"खुशबू जैसे लोग
मिले अफ़साने में , एक पुराना ख़त खोला अन्जाने
में "
यहाँ कोई
ख़त तो
नहीं है , लेकिन एक
वाक्या है।
बात
है सन 2003 की , हम नागपुर
में MCA की
पढाई कर रहे थे
, मई का महीना था
और कुछ ही दिनों
में सेमेस्टर एग्जाम स्टार्ट होने वाले थे।
सेकंड
ईयर में एक इंटरनल
प्रोजेक्ट सबमिट करना रहता था।
उसी सिलसिले में एक
दोपहर हम अपने हॉस्टल
से अपने मित्र के
घर जाने के लिए
निकले।
हमारे
मित्र शांतनु "डे स्कॉलर " थे
और हमारे प्रोजेक्ट पार्टनर भी , हॉस्टल के
पास बस स्टॉप से
बस पकड़ी जो
हमें "टी -पॉइंट " पर
ड्राप कर दी।
वहां
से आगे जाने के
लिए हम दूसरी बस
का इंतज़ार करने लगे। रविवार
का दिन था , ऊपर
से नागपुर की झुलसा देने
वाली गर्मी , बसों की फ्रीक्वेंसी
काफी कम थी।
करीब 10 -15 मिनट
हो गए थे इंतज़ार
करते हुए , तभी एक सज्जन
बाइक पर आये और
हमसे एक वर्ड बोला
" लिफ़्ट " ? इतना सुनना था
कि हम हो
लिए उनके साथ। विकट
गर्मी होने के कारण
उन्होंने अपना चेहरा सफ़ेद
कपड़े से पूरी तरह
ढक रखा था और
सिर्फ एक काला चश्मा बाहर की ओर
झांक रहा था। रस्ते में उन्होंने हमसे
कुछ नहीं कहा और
न ही हमने , हम
तो प्रसन्न थे की चलो
लिफ्ट मिल गई और
मन ही मन उनका
धन्यवाद् कर रहे थे।
10 मिनट
में हमें जहां जाना
था वहां पहुँच गये
, बाइक से उतरने के
बाद हमने जैसे ही
उनको थैंक - यू बोला
, उन सज्जन ने एक बात
ऐसी बोली जो मेरे
कानो में शायद हमेशा
गूंजती रहेगी , उन्होंने कहा " थैंक
- यू बोलने
की ज़रुरत नहीं है , आप
भी कभी किसी की
हेल्प कर दीजियेगा "
इसके
पहले कि हम
रेस्पॉन्ड कर पाते , उन
सज्जन ने बाइक आगे
बढ़ा दी और हम
उनको देखते ही रह गए।
कुछ अनजान लोग इसी तरह एक खुशनुमा एहसास की तरह याद आ जाते हैं । कुछ ऐसे यादें दे जाते हैं जो हमेशा साथ रहती हैं। लिखते रहे। ऐसे ही वाकये शेयर करते रहें। बधाई पहले पोस्ट के लिए।
ReplyDeleteNice story! Share some more motivational anecdotes like this. Very Interesting.
ReplyDeleteWell done Siddhartha...
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